Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.134.41: अजामीधकुलभूषण कुन्तीनंदन! तुम अपने बन्धुओं और ब्राह्मणों के साथ यहाँ एक रात तक सुखपूर्वक श्रद्धापूर्वक निवास करो और कल से पुनः मेरे साथ अन्य पवित्र तीर्थों की यात्रा करो, पवित्र कर्मों में अटूट श्रद्धा और भक्ति के साथ॥ 41॥ | mahabharat अध्याय 3.134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अजामीधकुलभूषण कुन्तीनंदन! तुम अपने बन्धुओं और ब्राह्मणों के साथ यहाँ एक रात तक सुखपूर्वक श्रद्धापूर्वक निवास करो और कल से पुनः मेरे साथ अन्य पवित्र तीर्थों की यात्रा करो, पवित्र कर्मों में अटूट श्रद्धा और भक्ति के साथ॥ 41॥
Ajamidhkulbhushan Kunti Nandan! You should stay here with your brothers and Brahmins comfortably for one night with faith and from tomorrow onwards you should again travel with me to other holy places of pilgrimage with unwavering faith and devotion in pious deeds.॥ 41॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायामष्टावक्रीये चतुस्त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें अष्टावक्रीयोपाख्यानविषयक एक सौ चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥