श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.134.39 
ततोऽष्टावक्रमातुरथान्तिके पिता
नदीं समङ्गां शीघ्रमिमां विशस्व।
प्रोवाच चैनं स तथा विवेश
समैरङ्गैश्चापि बभूव सद्य:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पिता कहोड़ ने अपनी माता सुजाता के समक्ष अपने पुत्र अष्टावक्र से कहा - 'पुत्र! तुम तुरन्त ही इस समंगा नदी में स्नान करने के लिए प्रवेश करो।' पिता की आज्ञा मानकर अष्टावक्र स्नान करने के लिए उस नदी में प्रवेश कर गए। नदी के जल का स्पर्श होते ही उनके सभी अंग तुरन्त ही सीधे हो गए। 39.
 
Thereafter, father Kahod said to his son Ashtavakra in the presence of his mother Sujata - 'Son! You should immediately enter this river 'Samanga' to take a bath.' As per the father's order, Ashtavakra entered that river to take a bath. On touching its water, all his limbs became straight immediately. 39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)