श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.134.33 
कहोड उवाच
इत्यर्थमिच्छन्ति सुताञ्जना जनक कर्मणा।
यदहं नाशकं कर्तुं तत् पुत्र: कृतवान् मम॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
उस समय कहोड़ बोले - राजा जनक ! इसीलिए लोग अच्छे कर्म करके पुत्र प्राप्ति की कामना करते हैं, क्योंकि जो कार्य मैं नहीं कर सका, उसे मेरे पुत्र ने सम्पन्न कर दिया ॥33॥
 
At that time Kahod said - King Janaka! This is why people wish to have a son by doing good deeds, because the work that I could not do, my son accomplished it. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)