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mahabharat 3.134.25: वे सब वरुण का यज्ञ देखने गए हैं और अब लौट रहे हैं। मैं उन पूज्य ब्राह्मण अष्टावक्र को प्रणाम करता हूँ, जिनके कारण मैं अपने पिता से मिल सकूँगा॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.134.25 
ते तु सर्वे वरुणस्योत यज्ञं
द्रष्टुं गता इह आयान्ति भूय:।
अष्टावक्रं पूजये पूजनीयं
यस्य हेतोर्जनितारं समेष्ये॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वे सब वरुण का यज्ञ देखने गए हैं और अब लौट रहे हैं। मैं उन पूज्य ब्राह्मण अष्टावक्र को प्रणाम करता हूँ, जिनके कारण मैं अपने पिता से मिल सकूँगा॥ 25॥
 
All of them have gone to see the sacrifice of Varuna and are now returning. I offer my respects to the venerable Brahmin Ashtavakra, because of whom I will be able to meet my father.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)