बन्द्युवाच
अहं पुत्रो वरुणस्योत राज्ञ-
स्तत्रास सत्रं द्वादशवार्षिकं वै।
सत्रेण ते जनक तुल्यकालं
तदर्थं ते प्रहिता मे द्विजाग्रॺा:॥ २४॥
अनुवाद
बंदी ने कहा - राजा जनक! मैं राजा वरुण का पुत्र हूँ। मेरे पिता के यहाँ भी आपके समान ही एक यज्ञ हो रहा था, जो बारह वर्षों में पूर्ण होना था। उस यज्ञ को सम्पन्न कराने के लिए मैंने कुछ चुने हुए श्रेष्ठ ब्राह्मणों को (जल में डुबाने के बहाने) वरुणलोक भेजा था।
Bandi said— King Janaka! I am the son of King Varuna. A similar yajna like yours was being performed at my father's place which was to be completed in twelve years. For the purpose of performing that yajna, I had sent some selected and excellent Brahmins to Varunlok (under the pretext of dipping them in water).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥