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mahabharat 3.134.11: अष्टावक्र बोले - ब्राह्मणों के आश्रम चार हैं। इस यज्ञ का भार वहन करने वाले वर्ण भी चार हैं। मुख्य दिशाएँ भी चार हैं (3)। वर्ण भी चार हैं और वाणी भी चार चरणों वाली बताई गई है।   |   mahabharat अध्याय 3.134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.134.11 
अष्टावक्र उवाच
चतुष्टयं ब्राह्मणानां निकेतं
चत्वारो वर्णा यज्ञमिमं वहन्ति।
दिशश्चतस्रो वर्णचतुष्टयं च
चतुष्पदा गौरपि शश्वदुक्ता॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अष्टावक्र बोले - ब्राह्मणों के आश्रम चार हैं। इस यज्ञ का भार वहन करने वाले वर्ण भी चार हैं। मुख्य दिशाएँ भी चार हैं (3)। वर्ण भी चार हैं और वाणी भी चार चरणों वाली बताई गई है।
 
Ashtavakra said - There are four ashrams for Brahmins. There are also four Varnas (castes) which bear the burden of this yagya. There are also four main directions (3). There are also four Varnas (castes) and four and speech (go) is also always described as consisting of four feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)