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mahabharat 3.133.5: द्वारपाल ने कहा, "ब्राह्मणपुत्र! सुनो, हम बंदी के आज्ञाकारी सेवक हैं। कृपया हमारी बात सुनो। युवा ब्राह्मणों को इस यज्ञ-वेदी में प्रवेश की अनुमति नहीं है। केवल वृद्ध और बुद्धिमान ब्राह्मणों को ही यहाँ प्रवेश की अनुमति है।"   |   mahabharat अध्याय 3.133: अष्टावक्रका द्वारपाल तथा राजा जनकसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 133: अष्टावक्रका द्वारपाल तथा राजा जनकसे वार्तालाप  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.133.5 
द्वारपाल उवाच
बन्दे: समादेशकरा वयं स्म
निबोध वाक्यं च मयेर्यमाणम्।
न वै बाला: प्रविशन्त्यत्र विप्रा
वृद्धा विदग्धा: प्रविशन्त्यत्र विप्रा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
द्वारपाल ने कहा, "ब्राह्मणपुत्र! सुनो, हम बंदी के आज्ञाकारी सेवक हैं। कृपया हमारी बात सुनो। युवा ब्राह्मणों को इस यज्ञ-वेदी में प्रवेश की अनुमति नहीं है। केवल वृद्ध और बुद्धिमान ब्राह्मणों को ही यहाँ प्रवेश की अनुमति है।"
 
The gatekeeper said, "Brahmin's son! Listen, we are the captive's obedient servants. Please listen to what we say. Young Brahmins are not allowed to enter this sacrificial altar. Only old and wise Brahmins are allowed to enter here."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)