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mahabharat 3.133.23: अष्टावक्र बोले, "महाराज! बंदी को अभी तक हम जैसे लोगों से शास्त्रार्थ करने का अवसर नहीं मिला, इसीलिए वह सिंह के समान हो गया है और निर्भय होकर बातें कर रहा है। आज जब वह मुझसे मिलेगा, तो पराजित होकर मृत व्यक्ति की तरह सो जाएगा। जैसे सड़क पर पड़ी टूटी हुई गाड़ी का पहिया एक कदम भी आगे नहीं बढ़ता।" 23.   |   mahabharat अध्याय 3.133: अष्टावक्रका द्वारपाल तथा राजा जनकसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 133: अष्टावक्रका द्वारपाल तथा राजा जनकसे वार्तालाप  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.133.23 
अष्टावक्र उवाच
विवादितोऽसौ न हि मादृशैर्हि
सिंहीकृतस्तेन वदत्यभीत:।
समेत्य मां निहत: शेष्यतेऽद्य
मार्गे भग्नं शकटमिवाचलाक्षम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अष्टावक्र बोले, "महाराज! बंदी को अभी तक हम जैसे लोगों से शास्त्रार्थ करने का अवसर नहीं मिला, इसीलिए वह सिंह के समान हो गया है और निर्भय होकर बातें कर रहा है। आज जब वह मुझसे मिलेगा, तो पराजित होकर मृत व्यक्ति की तरह सो जाएगा। जैसे सड़क पर पड़ी टूटी हुई गाड़ी का पहिया एक कदम भी आगे नहीं बढ़ता।" 23.
 
Ashtavakra said, "Maharaj! Bandi has not yet got the opportunity to debate with people like us, that is why he has become like a lion and talks fearlessly. Today when he meets me, he will be defeated and will sleep like a dead person. Just like a broken cart lying on the road, its wheel does not move even a step forward." 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)