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mahabharat 3.133.16: द्वारपाल ने कहा, "तुम्हारे जैसे दस वर्ष के बालक का उस यज्ञ-वेदी में प्रवेश कैसे संभव है, जहाँ विद्वान् लोग प्रवेश करते हैं? फिर भी मैं तुम्हें किसी प्रकार भीतर ले जाने का प्रयत्न करूँगा। तुम भी भीतर जाने का समुचित प्रयत्न करो।"   |   mahabharat अध्याय 3.133: अष्टावक्रका द्वारपाल तथा राजा जनकसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 133: अष्टावक्रका द्वारपाल तथा राजा जनकसे वार्तालाप  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.133.16 
द्वारपाल उवाच
कथं यज्ञं दशवर्षो विशेस्त्वं
विनीतानां विदुषां सम्प्रवेशम्।
उपायत: प्रयतिष्ये तवाहं
प्रवेशने कुरु यत्नं यथावत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
द्वारपाल ने कहा, "तुम्हारे जैसे दस वर्ष के बालक का उस यज्ञ-वेदी में प्रवेश कैसे संभव है, जहाँ विद्वान् लोग प्रवेश करते हैं? फिर भी मैं तुम्हें किसी प्रकार भीतर ले जाने का प्रयत्न करूँगा। तुम भी भीतर जाने का समुचित प्रयत्न करो।"
 
The gatekeeper said, "How is it possible for a ten-year-old boy like you to enter the sacrificial altar where educated scholars enter? However, I will try to get you inside by some means. You too make proper efforts to go inside."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)