श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 133: अष्टावक्रका द्वारपाल तथा राजा जनकसे वार्तालाप  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.133.10 
द्वारपाल उवाच
वृद्धेभ्य एवेह मतिं स्म बाला
गृह्णन्ति कालेन भवन्ति वृद्धा:।
न हि ज्ञानमल्पकालेन शक्यं
कस्माद् बाल: स्थविर इव प्रभाषसे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
द्वारपाल ने कहा - बालक बड़ों से ज्ञान प्राप्त करते हैं और समय के साथ वे भी वृद्ध हो जाते हैं। अल्पकाल में ज्ञान प्राप्त करना असम्भव है, फिर तुम बालक होकर वृद्धों जैसी बातें क्यों कर रहे हो?॥10॥
 
The gatekeeper said - Children acquire knowledge from elders and with time they too grow old. It is impossible to acquire knowledge in a short span of time, so why do you, being a child, talk like an old man?॥10॥
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