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mahabharat 3.133.1: अष्टावक्र बोले - हे राजन! जब तक ब्राह्मण न मिले, तब तक अंधे, बहरे, स्त्री, कुली और राजा का मार्ग एक-दूसरे को छोड़ देना चाहिए; किन्तु यदि ब्राह्मण मिल जाए, तो पहले उसे मार्ग दे देना चाहिए॥1॥   |   mahabharat अध्याय 3.133: अष्टावक्रका द्वारपाल तथा राजा जनकसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 133: अष्टावक्रका द्वारपाल तथा राजा जनकसे वार्तालाप  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.133.1 
अष्टावक्र उवाच
अन्धस्य पन्था बधिरस्य पन्था:
स्त्रिय: पन्था भारवाहस्य पन्था:।
राज्ञ: पन्था ब्राह्मणेनासमेत्य
समेत्य तु ब्राह्मणस्यैव पन्था:॥ १॥
 
 
अनुवाद
अष्टावक्र बोले - हे राजन! जब तक ब्राह्मण न मिले, तब तक अंधे, बहरे, स्त्री, कुली और राजा का मार्ग एक-दूसरे को छोड़ देना चाहिए; किन्तु यदि ब्राह्मण मिल जाए, तो पहले उसे मार्ग दे देना चाहिए॥1॥
 
Ashtavakra said - O King! Until one encounters a Brahmin, one should leave the path of a blind man, a deaf man, a woman, a porter and a king to one another; but if one comes across a Brahmin, one should give him the path first.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)