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mahabharat 3.132.4: एक बार दोनों चाचा-भतीजे विदेहराज की यज्ञवेदी पर गए। दोनों ही ब्राह्मण अतुलनीय विद्वान थे। वहाँ शास्त्रार्थ के दौरान दोनों ने अपने (प्रतिद्वंद्वी) बंदी को परास्त कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.132: अष्टावक्रके जन्मका वृत्तान्त और उनका राजा जनकके दरबारमें जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 132: अष्टावक्रके जन्मका वृत्तान्त और उनका राजा जनकके दरबारमें जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.132.4 
विदेहराजस्य महीपतेस्तौ
विप्रावुभौ मातुलभागिनेयौ।
प्रविश्य यज्ञायतनं विवादे
बन्दिं निजग्राहतुरप्रमेयौ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
एक बार दोनों चाचा-भतीजे विदेहराज की यज्ञवेदी पर गए। दोनों ही ब्राह्मण अतुलनीय विद्वान थे। वहाँ शास्त्रार्थ के दौरान दोनों ने अपने (प्रतिद्वंद्वी) बंदी को परास्त कर दिया।
 
Once both the uncle and nephew went to the sacrificial altar of Videhraj. Both the Brahmins were incomparable scholars. There, during a debate, both of them defeated their (opponent) prisoner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)