श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 132: अष्टावक्रके जन्मका वृत्तान्त और उनका राजा जनकके दरबारमें जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.132.19 
यत् तेनोक्तं दुरुक्तं तत् तदानीं
हृदि स्थितं तस्य सुदु:खमासीत्।
गृहं गत्वा मातरं सोऽभिगम्य
पप्रच्छेदं क्व नु तातो ममेति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
श्वेतकेतु की उस कठोर बात से अष्टावक्र के हृदय को बहुत ठेस पहुँची। इससे वे अत्यन्त दुःखी हुए। उन्होंने घर जाकर अपनी माता से पूछा - 'माता! मेरे पिता कहाँ हैं?'॥19॥
 
That harsh remark of Shwetaketu deeply hurt Ashtavakra's heart. This made him very sad. He went to his mother at home and asked - 'Mother! Where is my father?'॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)