श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 132: अष्टावक्रके जन्मका वृत्तान्त और उनका राजा जनकके दरबारमें जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.132.14 
कथं करिष्याम्यधुना महर्षे
मासश्चायं दशमो वर्तते मे।
नैवास्ति ते वसु किंचित् प्रजाता
येनाहमेतामापदं निस्तरेयम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'महर्षि! यह मेरे गर्भ का दसवाँ महीना है। मैं दरिद्र स्त्री होकर कैसे व्यय चलाऊँगी? आपके पास तो थोड़ा-सा भी धन नहीं है, जिससे मैं प्रसव के इस संकट का निवारण कर सकूँ।'॥14॥
 
'Maharshi! This is the tenth month of my pregnancy. How will I, a penniless woman, manage the expenses? You do not have even a little money with which I can overcome this crisis of delivery.'॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)