Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.132.12: उस शाप के अनुसार, वह ऋषि आठों अंगों से विकृत होकर उत्पन्न हुआ। अतः वह अष्टावक्र नाम से प्रसिद्ध हुआ। श्वेतकेतु उसका मामा था, किन्तु उसकी आयु भी उसकी ही थी।॥12॥ | mahabharat अध्याय 3.132: अष्टावक्रके जन्मका वृत्तान्त और उनका राजा जनकके दरबारमें जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स वै तथा वक्र एवाभ्यजाय-
दष्टावक्र: प्रथितो वै महर्षि:।
अस्यासीद् वै मातुल: श्वेतकेतु:
स तेन तुल्यो वयसा बभूव॥ १२॥
अनुवाद
उस शाप के अनुसार, वह ऋषि आठों अंगों से विकृत होकर उत्पन्न हुआ। अतः वह अष्टावक्र नाम से प्रसिद्ध हुआ। श्वेतकेतु उसका मामा था, किन्तु उसकी आयु भी उसकी ही थी।॥12॥
According to that curse, the sage was born with deformities in all his eight limbs. Hence, he became famous by the name Ashtavakra. Swetaketu was his maternal uncle, but was of the same age as him.॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥