श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 131: राजा उशीनरद्वारा बाजको अपने शरीरका मांस देकर शरणमें आये हुए कबूतरके प्राणोंकी रक्षा करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.131.8 
शक्यते दुस्त्यजेऽप्यर्थे चिररात्राय जीवितुम्।
न तु भोजनमुत्सृज्य शक्यं वर्तयितुं चिरम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जिस धन को त्यागना अत्यन्त कठिन है, उसके बिना मनुष्य बहुत दिनों तक जीवित रह सकता है, किन्तु यदि कोई अन्न का त्याग कर दे, तो कोई भी बहुत दिनों तक जीवित नहीं रह सकता ॥8॥
 
A man can survive for a long time without that wealth which is very difficult to give up, but if one gives up food, no one can survive for long. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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