श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 131: राजा उशीनरद्वारा बाजको अपने शरीरका मांस देकर शरणमें आये हुए कबूतरके प्राणोंकी रक्षा करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.131.30 
यत् ते मांसानि गात्रेभ्य उत्कृत्तानि विशाम्पते।
एषा ते भास्वती कीर्तिर्लोकानभिभविष्यति॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! आपके शरीर के अंगों से जो मांस आपने काटा है, उससे जो आपकी कीर्ति फैलेगी, वह समस्त लोकों से भी अधिक होगी। ॥30॥
 
O Prajanath! Your illustrious fame, spread by the flesh that you have cut from your body parts and offered, will surpass that of all the people. ॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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