श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 131: राजा उशीनरद्वारा बाजको अपने शरीरका मांस देकर शरणमें आये हुए कबूतरके प्राणोंकी रक्षा करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.131.29 
श्येन उवाच
इन्द्रोऽहमस्मि धर्मज्ञ कपोतो हव्यवाडयम्।
जिज्ञासमानौ धर्मं त्वां यज्ञवाटमुपागतौ॥ २९॥
 
 
अनुवाद
गरुड़ बोला- हे धर्म के ज्ञाता राजन! मैं इन्द्र हूँ और यह कबूतर स्वयं अग्निदेव हैं। हम दोनों इस यज्ञ वेदी पर आपके धर्म की परीक्षा लेने आए हैं।
 
The eagle said- O King who knows Dharma! I am Indra and this pigeon is Agnidev himself. We both came to you in this sacrificial altar to test your Dharma.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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