श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 131: राजा उशीनरद्वारा बाजको अपने शरीरका मांस देकर शरणमें आये हुए कबूतरके प्राणोंकी रक्षा करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.131.18 
श्येन उवाच
न वराहं न चोक्षाणं न मृगान् विविधांस्तथा।
भक्षयामि महाराज किं ममान्येन केनचित्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
बाज बोला, "महाराज! मैं न तो सूअर खाऊँगा, न कोई और अच्छा जानवर, न ही सभी प्रकार के हिरण खाऊँगा। मुझे किसी और चीज़ से क्या लेना-देना?"
 
The eagle said, "Maharaj! I will neither eat pigs, nor any other good animal, nor will I eat all kinds of deer. What do I have to do with anything else?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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