श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 131: राजा उशीनरद्वारा बाजको अपने शरीरका मांस देकर शरणमें आये हुए कबूतरके प्राणोंकी रक्षा करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.131.17 
शक्यश्चाप्यन्यथा कर्तुमाहारोऽप्यधिकस्त्वया।
गोवृषो वा वराहो वा मृगो वा महिषोऽपि वा।
त्वदर्थमद्य क्रियतां यच्चान्यदिह काङ्क्षसि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
परन्तु तुम्हारे लिए भोजन का प्रबन्ध किसी अन्य प्रकार से भी किया जा सकता है और वह इस कबूतर से भी अधिक हो सकता है। सूअर, हिरण, भैंसा या कोई भी अच्छा पशु या और जो भी तुम्हारी इच्छा हो, वह तुम्हें भेंट किया जा सकता है ॥17॥
 
But food can be arranged for you in some other way and it can be more than this pigeon. Pig, deer, buffalo or any good animal or whatever else you desire can be presented to you. ॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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