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mahabharat 3.131.16: फिर भी आप शरणागत पुरुष के त्याग को कैसे अच्छा मानते हैं? यह मेरी समझ में नहीं आता। हे विहंगम! वास्तव में आपका प्रयास केवल भोजन प्राप्ति के लिए है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.131: राजा उशीनरद्वारा बाजको अपने शरीरका मांस देकर शरणमें आये हुए कबूतरके प्राणोंकी रक्षा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 131: राजा उशीनरद्वारा बाजको अपने शरीरका मांस देकर शरणमें आये हुए कबूतरके प्राणोंकी रक्षा करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.131.16 
शरणैषिपरित्यागं कथं साध्विति मन्यसे।
आहारार्थं समारम्भस्तव चायं विहंगम॥ १६॥
 
 
अनुवाद
फिर भी आप शरणागत पुरुष के त्याग को कैसे अच्छा मानते हैं? यह मेरी समझ में नहीं आता। हे विहंगम! वास्तव में आपका प्रयास केवल भोजन प्राप्ति के लिए है॥16॥
 
Yet how do you consider the renunciation of a person who has taken refuge as good? I do not understand this. O Vihangam! In reality, your endeavour is only to obtain food.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)