श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 131: राजा उशीनरद्वारा बाजको अपने शरीरका मांस देकर शरणमें आये हुए कबूतरके प्राणोंकी रक्षा करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.131.13 
गुरुलाघवमादाय धर्माधर्मविनिश्चये।
यतो भूयांस्ततो राजन् कुरुष्व धर्मनिश्चयम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजन! धर्म और अधर्म का निर्णय करते समय पुण्य और पाप के गुण-दोष पर दृष्टि रखो और जिसमें अधिक पुण्य हो, उसे ही आचरण योग्य धर्म समझो। 13॥
 
Rajan! While deciding between righteousness and unrighteousness, consider keeping an eye on the merits and demerits of virtue and sin and consider the one which has more virtue as the religion worth practicing. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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