श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 130: विभिन्न तीर्थोंकी महिमा और राजा उशीनरकी कथाका आरम्भ  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.130.24 
ऊरू राज्ञ: समासाद्य कपोत: श्येनजाद् भयात्।
शरणार्थी तदा राजन्निलिल्ये भयपीडित:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
बाज के डर से कबूतर अपनी रक्षा के लिए राजा की गोद में छिप गया।
 
The pigeon, seeking shelter for its protection, out of fear of the hawk, hid itself in the king's lap. 24.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां श्येनकपोतीये त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें श्येनकपोतीयोपाख्यानविषयक एक सौ तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)