श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 130: विभिन्न तीर्थोंकी महिमा और राजा उशीनरकी कथाका आरम्भ  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.130.20 
वितस्तां पश्य राजेन्द्र सर्वपापप्रमोचनीम्।
महर्षिभिश्चाध्युषितां शीततोयां सुनिर्मलाम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजेंद्र! वितस्ता (झेलम) नदी के दर्शन करो जो सभी पापों से मुक्ति दिलाती है। इसका जल अत्यंत शीतल और पवित्र है। इसके तट पर अनेक महान ऋषि-मुनि निवास करते हैं।
 
Rajendra! Visit the Vitasta (Jhelum) river which frees one from all sins. Its water is very cool and extremely pure. Many great sages live on its banks.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)