हे भरतवंशी रत्न! अरे! तुम सब लोग महान संकट में पड़ गए हो। मैं तुम्हें और तुम्हारे सभी भाइयों को दुःख के सागर में डूबते हुए देख रहा हूँ॥ 17॥
O jewel of the Bharat clan! Oh! All of you have fallen into great difficulty. I can see you along with all your brothers drowning in the ocean of misery.॥ 17॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि वासुदेववाक्ये त्रयोदशोऽध्याय:॥ १३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें वासुदेववाक्यविषयक तेरहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)