श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 13: श्रीकृष्णका जूएके दोष बताते हुए पाण्डवोंपर आयी हुई विपत्तिमें अपनी अनुपस्थितिको कारण मानना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.13.16 
श्रुत्वैव चाहं राजेन्द्र परमोद्विग्नमानस:।
तूर्णमभ्यागतोऽस्मि त्वां द्रष्टुकामो विशाम्पते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! यह सुनकर मैं अत्यन्त व्याकुल हो गया और प्रजेश्वर! मैं तुरन्त ही आपसे मिलने आया हूँ॥16॥
 
Rajendra! On hearing this I became very agitated and Prajeshwar! I immediately came to meet you.॥ 16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd