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श्लोक 3.13.14  |
असांनिध्यं तु कौरव्य ममानर्तेष्वभूत् तदा।
येनेदं व्यसनं प्राप्ता भवन्तो द्यूतकारितम्॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| हे कुरुश्रेष्ठ! मैं उन दिनों आनर्तस में नहीं था; इसी कारण तुम सब पर जुए के कारण यह विपत्ति आई॥ 14॥ |
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| O best of the Kurus! I was not in Anartasa in those days; that is why this calamity caused by gambling befell you all.॥ 14॥ |
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