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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 13: श्रीकृष्णका जूएके दोष बताते हुए पाण्डवोंपर आयी हुई विपत्तिमें अपनी अनुपस्थितिको कारण मानना
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श्लोक 14
श्लोक
3.13.14
असांनिध्यं तु कौरव्य ममानर्तेष्वभूत् तदा।
येनेदं व्यसनं प्राप्ता भवन्तो द्यूतकारितम्॥ १४॥
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! मैं उन दिनों आनर्तस में नहीं था; इसी कारण तुम सब पर जुए के कारण यह विपत्ति आई॥ 14॥
O best of the Kurus! I was not in Anartasa in those days; that is why this calamity caused by gambling befell you all.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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