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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 13: श्रीकृष्णका जूएके दोष बताते हुए पाण्डवोंपर आयी हुई विपत्तिमें अपनी अनुपस्थितिको कारण मानना
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श्लोक 12
श्लोक
3.13.12
न चेत् स मम राजेन्द्र गृह्णीयान्मधुरं वच:।
पथ्यं च भरतश्रेष्ठ निगृह्णीयां बलेन तम्॥ १२॥
अनुवाद
राजेन्द्र! भरतश्रेष्ठ! यदि वे मेरे मधुर एवं हितकारी वचनों को सुनकर स्वीकार न करते, तो मैं उन्हें बलपूर्वक रोक लेता॥12॥
Rajendra! Bharatshrestha! If they had not accepted my sweet and beneficial words after hearing them, I would have stopped them by force. 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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