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mahabharat 3.129.9: श्लोक का अर्थ इस प्रकार है - 'हे! युगन्धर में दही खाकर, अच्युतस्थल में निवास करके और पृथ्वी में स्नान करके तुम अपने पुत्र के साथ यहाँ रहने के अधिकारी कैसे हो सकते हो?॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.129: कुरुक्षेत्रके द्वारभूत प्लक्षप्रस्रवण नामक यमुनातीर्थ एवं सरस्वतीतीर्थकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.129.9 
युगन्धरे दधि प्राश्य उषित्वा चाच्युतस्थले।
तद्वद् भूतलये स्नात्वा सपुत्रा वस्तुमर्हसि॥ ९॥
 
 
अनुवाद
श्लोक का अर्थ इस प्रकार है - 'हे! युगन्धर में दही खाकर, अच्युतस्थल में निवास करके और पृथ्वी में स्नान करके तुम अपने पुत्र के साथ यहाँ रहने के अधिकारी कैसे हो सकते हो?॥9॥
 
The meaning of the verse is like this - 'Oh! How can you, after eating curd in Yugandhar, 1 residing in Achyutasthal 2 and bathing in the earth, become entitled to live here with your son?॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)