Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.129.5: देखो, यहाँ नाना प्रकार की वेदियाँ हैं जिनमें अग्नि प्रज्वलित है, जो सम्पूर्ण पृथ्वी पर व्याप्त हैं; मानो पृथ्वी ययाति के यज्ञों से अभिभूत होकर उनकी पवित्र धारा में डूब रही है॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.129: कुरुक्षेत्रके द्वारभूत प्लक्षप्रस्रवण नामक यमुनातीर्थ एवं सरस्वतीतीर्थकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 129: कुरुक्षेत्रके द्वारभूत प्लक्षप्रस्रवण नामक यमुनातीर्थ एवं सरस्वतीतीर्थकी महिमा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.129.5 
पश्य नानाविधाकारैरग्निभिर्निचितां महीम्।
मज्जन्तीमिव चाक्रान्तां ययातेर्यज्ञकर्मभि:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
देखो, यहाँ नाना प्रकार की वेदियाँ हैं जिनमें अग्नि प्रज्वलित है, जो सम्पूर्ण पृथ्वी पर व्याप्त हैं; मानो पृथ्वी ययाति के यज्ञों से अभिभूत होकर उनकी पवित्र धारा में डूब रही है॥5॥
 
Behold, here are various altars with fires burning in them, which pervade the entire land; as if the earth is overwhelmed by the sacrificial acts of Yayati and is drowning in their holy stream. ॥5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)