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श्लोक  3.129.22 
वेदी प्रजापतेरेषा समन्तात् पञ्चयोजना।
कुरोर्वै यज्ञशीलस्य क्षेत्रमेतन्महात्मन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
यह प्रजापति की यज्ञ वेदी है जो चारों ओर पाँच योजन तक फैली हुई है। यह महान राजा कुरुका का क्षेत्र है जो यज्ञों में समर्पित थे।
 
This is Prajapati's sacrificial altar spread over five yojanas on all sides. This is the area of the great king Kuruka who was devoted to sacrifices.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायामेकोनत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय: ॥ १२९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राविषयक एक सौ उनतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल २२ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)