Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.129.14: यहीं पर महर्षियों ने, जिन्होंने यूप, ओखल आदि यज्ञ सामग्री एकत्रित की थी, सरस्वती यज्ञ किया था तथा आभृत स्नान किया था।   |   mahabharat अध्याय 3.129: कुरुक्षेत्रके द्वारभूत प्लक्षप्रस्रवण नामक यमुनातीर्थ एवं सरस्वतीतीर्थकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 129: कुरुक्षेत्रके द्वारभूत प्लक्षप्रस्रवण नामक यमुनातीर्थ एवं सरस्वतीतीर्थकी महिमा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.129.14 
अत्र सारस्वतैर्यज्ञैरीजाना: परमर्षय:।
यूपोलूखलिकास्तात गच्छन्त्यवभृथप्लवम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यहीं पर महर्षियों ने, जिन्होंने यूप, ओखल आदि यज्ञ सामग्री एकत्रित की थी, सरस्वती यज्ञ किया था तथा आभृत स्नान किया था।
 
It was here that the great sages, who had collected the sacrificial materials like the yup and mortar etc., performed the Saraswati yagna and took the Aabhritha bath. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)