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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 129: कुरुक्षेत्रके द्वारभूत प्लक्षप्रस्रवण नामक यमुनातीर्थ एवं सरस्वतीतीर्थकी महिमा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.129.1 
लोमश उवाच
अस्मिन् किल स्वयं राजन्निष्टवान् वै प्रजापति:।
सत्रमिष्टीकृतं नाम पुरा वर्षसहस्रिकम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
लोमश कहते हैं: युधिष्ठिर! पूर्वकाल में स्वयं प्रजापति ने यहाँ इष्टकृत नामक अनुष्ठान किया था, जो एक हजार वर्षों तक चला था॥1॥
 
Lomasha says: Yudhishthira! In the past, Prajapati himself had performed a ritual called Ishtikrit here, which continued for a thousand years.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)