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mahabharat 3.128.9: उसकी दाहिनी पसली पर पूर्वोक्त स्वर्ण चिह्न स्पष्ट दिखाई दे रहा था। वह आयु और गुणों की दृष्टि से राजा के सौ पुत्रों में श्रेष्ठ था।   |   mahabharat अध्याय 3.128: सोमकको सौ पुत्रोंकी प्राप्ति तथा सोमक और पुरोहितका समानरूपसे नरक और पुण्यलोकोंका उपभोग करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 128: सोमकको सौ पुत्रोंकी प्राप्ति तथा सोमक और पुरोहितका समानरूपसे नरक और पुण्यलोकोंका उपभोग करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.128.9 
तच्च लक्षणमस्यासीत् सौवर्णं पार्श्व उत्तरे।
तस्मिन् पुत्रशते चाग्रॺ: स बभूव गुणैरपि॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उसकी दाहिनी पसली पर पूर्वोक्त स्वर्ण चिह्न स्पष्ट दिखाई दे रहा था। वह आयु और गुणों की दृष्टि से राजा के सौ पुत्रों में श्रेष्ठ था।
 
The aforementioned golden mark was clearly visible on his right rib. He was the best among the hundred sons of the king in terms of age and qualities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)