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mahabharat 3.128.8: राजा! सोमक का ज्येष्ठ पुत्र जन्तु उसकी माता के गर्भ से उत्पन्न हुआ था। वह सभी रानियों में सबसे अधिक प्रिय था। वे अपने पुत्रों से उतना प्रेम नहीं करती थीं।   |   mahabharat अध्याय 3.128: सोमकको सौ पुत्रोंकी प्राप्ति तथा सोमक और पुरोहितका समानरूपसे नरक और पुण्यलोकोंका उपभोग करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 128: सोमकको सौ पुत्रोंकी प्राप्ति तथा सोमक और पुरोहितका समानरूपसे नरक और पुण्यलोकोंका उपभोग करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.128.8 
जन्तुर्ज्येष्ठ: समभवज्जनित्र्यामेव पार्थिव।
स तासामिष्ट एवासीन्न तथा ते निजा: सुता:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राजा! सोमक का ज्येष्ठ पुत्र जन्तु उसकी माता के गर्भ से उत्पन्न हुआ था। वह सभी रानियों में सबसे अधिक प्रिय था। वे अपने पुत्रों से उतना प्रेम नहीं करती थीं।
 
King! Somaka's eldest son Jantu was born from his mother's womb. He was the most loved of all the queens. They did not love their own sons as much. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)