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mahabharat 3.128.21: कौरवश्रेष्ठ! हम सभी इस आश्रम में छह रात तक निश्चिंत होकर अपने मन और इंद्रियों को वश में करके रहेंगे। आप इसके लिए तैयार हो जाइए।   |   mahabharat अध्याय 3.128: सोमकको सौ पुत्रोंकी प्राप्ति तथा सोमक और पुरोहितका समानरूपसे नरक और पुण्यलोकोंका उपभोग करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 128: सोमकको सौ पुत्रोंकी प्राप्ति तथा सोमक और पुरोहितका समानरूपसे नरक और पुण्यलोकोंका उपभोग करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.128.21 
एतस्मिन्नपि राजेन्द्र वत्स्यामो विगतज्वरा:।
षड्रात्रं नियतात्मान: सज्जीभव कुरूद्वह॥ २१॥
 
 
अनुवाद
कौरवश्रेष्ठ! हम सभी इस आश्रम में छह रात तक निश्चिंत होकर अपने मन और इंद्रियों को वश में करके रहेंगे। आप इसके लिए तैयार हो जाइए।
 
Best of the Kurus! We all will stay in this hermitage for six nights without any worries while controlling our mind and senses. You must get ready for this.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां जन्तूपाख्याने अष्टाविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें जन्तूपाख्यानविषयक एक सौ अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल २१ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)