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mahabharat 3.128.14: धर्म ने कहा - राजन! कर्ता के अतिरिक्त अन्य कोई भी अपने कर्मों का फल नहीं भोगता। हे वक्ताओं में श्रेष्ठ महाराज! आप अपने पुण्य कर्मों के फलस्वरूप प्राप्त हुए इन पुण्य लोकों को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं॥ 14॥   |   mahabharat अध्याय 3.128: सोमकको सौ पुत्रोंकी प्राप्ति तथा सोमक और पुरोहितका समानरूपसे नरक और पुण्यलोकोंका उपभोग करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 128: सोमकको सौ पुत्रोंकी प्राप्ति तथा सोमक और पुरोहितका समानरूपसे नरक और पुण्यलोकोंका उपभोग करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.128.14 
धर्म उवाच
नान्य: कर्तु: फलं राजन्नुपभुङ्‍‍क्ते कदाचन।
इमानि तव दृश्यन्ते फलानि वदतां वर॥ १४॥
 
 
अनुवाद
धर्म ने कहा - राजन! कर्ता के अतिरिक्त अन्य कोई भी अपने कर्मों का फल नहीं भोगता। हे वक्ताओं में श्रेष्ठ महाराज! आप अपने पुण्य कर्मों के फलस्वरूप प्राप्त हुए इन पुण्य लोकों को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं॥ 14॥
 
Dharma said - King! No one except the doer enjoys the fruits of his deeds. O best among speakers, Maharaj! You can clearly see these virtuous worlds which you have attained as a result of your virtuous deeds.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)