Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.127.7: इससे उसकी सभी माताओं ने भी अचानक चींटी को उसके शरीर से अलग कर दिया और बहुत दुखी होकर जोर-जोर से रोने लगीं। उनके रोने की सम्मिलित ध्वनि बहुत भयानक प्रतीत हो रही थी। | mahabharat अध्याय 3.127: सोमक और जन्तुका उपाख्यान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततस्ता मातर: सर्वा: प्राक्रोशन् भृशदु:खिता:।
प्रवार्य जन्तुं सहसा स शब्दस्तुमुलोऽभवत्॥ ७॥
अनुवाद
इससे उसकी सभी माताओं ने भी अचानक चींटी को उसके शरीर से अलग कर दिया और बहुत दुखी होकर जोर-जोर से रोने लगीं। उनके रोने की सम्मिलित ध्वनि बहुत भयानक प्रतीत हो रही थी।
Due to this all its mothers also suddenly removed the ant from the animal's body and became very sad and started crying loudly. The combined sound of their crying appeared very terrifying. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥