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mahabharat 3.127.4: राजा सोमक अपनी वृद्धावस्था में भी निरंतर इसके लिए प्रयत्नशील रहते थे; अतः एक समय उनकी सौ पत्नियों में से एक के गर्भ से एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम जन्तु रखा गया।   |   mahabharat अध्याय 3.127: सोमक और जन्तुका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 127: सोमक और जन्तुका उपाख्यान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.127.4 
कदाचित् तस्य वृद्धस्य घटमानस्य यत्नत:।
जन्तुर्नाम सुतस्तस्मिन् स्त्रीशते समजायत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजा सोमक अपनी वृद्धावस्था में भी निरंतर इसके लिए प्रयत्नशील रहते थे; अतः एक समय उनकी सौ पत्नियों में से एक के गर्भ से एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम जन्तु रखा गया।
 
King Somaka was constantly striving for this even in his old age; so at one time, from the womb of one of his hundred wives, a son was born, whose name was Jantu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)