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mahabharat 3.127.16: क्या कोई ऐसा उपयोगी कर्म हो सकता है जिससे मुझे सौ पुत्र प्राप्त हो सकें? वह महान, छोटा अथवा अत्यंत कठिन कर्म हो सकता है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.127: सोमक और जन्तुका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 127: सोमक और जन्तुका उपाख्यान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.127.16 
स्यात्तु कर्म तथा युक्तं येन पुत्रशतं भवेत्।
महता लघुना वापि कर्मणा दुष्करेण वा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
क्या कोई ऐसा उपयोगी कर्म हो सकता है जिससे मुझे सौ पुत्र प्राप्त हो सकें? वह महान, छोटा अथवा अत्यंत कठिन कर्म हो सकता है॥16॥
 
Can there be any useful deed that will enable me to have a hundred sons? It may be a great, small or extremely difficult deed.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)