vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 126: राजा मान्धाताकी उत्पत्ति और संक्षिप्त चरित्र
»
श्लोक 46
श्लोक
3.126.46
एतत् ते सर्वमाख्यातं मान्धातुश्चरितं महत्।
जन्म चाग्रॺं महीपाल यन्मां त्वं परिपृच्छसि॥ ४६॥
अनुवाद
हे राजन! मैंने आपको मान्धाता के जीवन की अद्भुत कथा और उनके महान चरित्र का वर्णन सुनाया है, जिसके विषय में आप मुझसे पूछ रहे थे ॥ 46॥
O king! I have narrated to you the wonderful story of Mandhata's life and his great character about which you were asking me. ॥ 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×