श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 126: राजा मान्धाताकी उत्पत्ति और संक्षिप्त चरित्र  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.126.46 
एतत् ते सर्वमाख्यातं मान्धातुश्चरितं महत्।
जन्म चाग्रॺं महीपाल यन्मां त्वं परिपृच्छसि॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैंने आपको मान्धाता के जीवन की अद्भुत कथा और उनके महान चरित्र का वर्णन सुनाया है, जिसके विषय में आप मुझसे पूछ रहे थे ॥ 46॥
 
O king! I have narrated to you the wonderful story of Mandhata's life and his great character about which you were asking me. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)