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mahabharat 3.126.42: उस महान राजा ने बारह वर्ष के अकाल के समय स्वयं वज्रधारी इन्द्र के सामने फसलों की भलाई के लिए जल बरसाया था।   |   mahabharat अध्याय 3.126: राजा मान्धाताकी उत्पत्ति और संक्षिप्त चरित्र   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.126.42 
तेन द्वादशवार्षिक्यामनावृष्ट्यां महात्मना।
वृष्टं सस्यविवृद्धॺर्थं मिषतो वज्रपाणिन:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
उस महान राजा ने बारह वर्ष के अकाल के समय स्वयं वज्रधारी इन्द्र के सामने फसलों की भलाई के लिए जल बरसाया था।
 
That great king had himself rained water for the welfare of the crops during a period of twelve years of drought, in front of the thunderbolt-bearing Indra. 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)