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mahabharat 3.126.24-26: ‘महाराज! तुमने प्यास लगने पर मेरे तप से संचित और विधिपूर्वक मंत्रों से अभिमंत्रित जल पिया है। उसके फलस्वरूप तुम एक ऐसे पुत्र को जन्म दोगी जो इन्द्र को जीत सकेगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हम तुम्हारी इच्छानुसार एक अद्भुत यज्ञ करेंगे, जिससे तुम स्वयं शक्तिशाली बनी रहोगी और इन्द्र के समान पराक्रमी पुत्र उत्पन्न कर सकोगी तथा तुम्हें गर्भाधान का कष्ट भी नहीं होगा।’॥24-26॥   |   mahabharat अध्याय 3.126: राजा मान्धाताकी उत्पत्ति और संक्षिप्त चरित्र   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 126: राजा मान्धाताकी उत्पत्ति और संक्षिप्त चरित्र  »  श्लोक 24-26
 
 
श्लोक  3.126.24-26 
पिपासितेन या: पीता विधिमन्त्रपुरस्कृता:।
आपस्त्वया महाराज मत्तपोवीर्यसम्भृता:॥ २४॥
ताभ्यस्त्वमात्मना पुत्रमीदृशं जनयिष्यसि।
विधास्यामो वयं तत्र तवेष्टिं परमाद्‍भुताम्॥ २५॥
यथा शक्रसमं पुत्रं जनयिष्यसि वीर्यवान्।
गर्भधारणजं वापि न खेदं समवाप्स्यसि॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘महाराज! तुमने प्यास लगने पर मेरे तप से संचित और विधिपूर्वक मंत्रों से अभिमंत्रित जल पिया है। उसके फलस्वरूप तुम एक ऐसे पुत्र को जन्म दोगी जो इन्द्र को जीत सकेगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हम तुम्हारी इच्छानुसार एक अद्भुत यज्ञ करेंगे, जिससे तुम स्वयं शक्तिशाली बनी रहोगी और इन्द्र के समान पराक्रमी पुत्र उत्पन्न कर सकोगी तथा तुम्हें गर्भाधान का कष्ट भी नहीं होगा।’॥24-26॥
 
‘Maharaj! Being thirsty, you have drunk the water collected by my austerity and consecrated with mantras as per the rituals. Because of that, you will give birth to a son who can conquer Indra. To achieve this objective, we will perform a wonderful yajna as per your wish, so that you yourself will remain powerful and will be able to produce a son as powerful as Indra and you will not experience the pain of pregnancy.’॥ 24-26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)