श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 126: राजा मान्धाताकी उत्पत्ति और संक्षिप्त चरित्र  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  3.126.21-22 
महाबलो महावीर्यस्तपोबलसमन्वित:।
य: शक्रमपि वीर्येण गमयेद् यमसादनम्॥ २१॥
अनेन विधिना राजन् मयैतदुपपादितम्।
अब्भक्षणं त्वया राजन्न युक्तं कृतमद्य वै॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘राजन्! मैंने उपर्युक्त विधि से इस जल को इतना शक्तिशाली बना दिया था कि इसे पीने से एक अत्यन्त बलवान, पराक्रमी और तपस्वी पुत्र उत्पन्न होगा जो अपने बल और पराक्रम से देवराज इन्द्र को भी यमलोक भेज सकेगा। तुमने आज वही जल पी लिया, यह अच्छा नहीं हुआ॥ 21-22॥
 
‘King! By the above mentioned method, I had made this water so powerful that by drinking it, a very strong, very valiant and austere son would be born who could send even Devraj Indra to Yamaloka by his strength and valour. You drank the same water today, this was not good.॥ 21-22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)