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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 126: राजा मान्धाताकी उत्पत्ति और संक्षिप्त चरित्र  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.126.17 
ततस्ते प्रत्यबुध्यन्त मुनय: सतपोधना:।
निस्तोयं तं च कलशं ददृशु: सर्व एव ते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात तपस्वी च्यवन मुनि सहित सभी ऋषिगण जाग गए और उन्होंने देखा कि घड़ा जल से खाली हो गया है।
 
Thereafter all the sages including the ascetic Chyavan Muni woke up. They all saw that the pitcher was empty of water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)