श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 126: राजा मान्धाताकी उत्पत्ति और संक्षिप्त चरित्र  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.126.15 
ततस्तं कलशं दृष्ट्वा जलपूर्णं स पार्थिव:।
अभ्यद्रवत वेगेन पीत्वा चाम्भो व्यवासृजत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसकी दृष्टि जल से भरे हुए पूर्वोक्त घड़े पर पड़ी। उसे देखते ही वह बड़े वेग से उसकी ओर दौड़ा और उसे पीकर (इच्छानुसार) शेष जल वहीं गिरा दिया॥15॥
 
Thereafter his eyes fell on the aforesaid pitcher filled with water. As soon as he saw it he ran towards it with great speed and after drinking it (as per his wish) he spilled the remaining water there.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)