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mahabharat 3.125.4-7h: 'आपके द्वारा आयोजित यह यज्ञ मिथ्या न हो। आपने जो कुछ किया है, वह उत्तम अनुष्ठान हो। हे ब्रह्मर्षि! मैं जानता हूँ कि आप अपने संकल्प को कभी भी नष्ट नहीं होने देंगे। आज जैसे आपने इन अश्विनीकुमारों को सोमपान के योग्य बनाया है, वैसे ही मेरा भी कल्याण करें। हे भृगुपुत्र! आपका परम तेज प्रकट हो और सुकन्या तथा उसके पिता का यश संसार में फैले। इसी उद्देश्य से मैंने आपके बल और पराक्रम को प्रकट करने के लिए यह कार्य किया है। अतः आप प्रसन्न होकर मुझ पर अपनी कृपा बरसाएँ। आप जो चाहेंगे, वही होगा।'॥ 4-6॥   |   mahabharat अध्याय 3.125: अश्विनीकुमारोंका यज्ञमें भाग स्वीकार कर लेनेपर इन्द्रका संकट-मुक्त होना तथा लोमशजीके द्वारा अन्यान्य तीर्थोंके महत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 125: अश्विनीकुमारोंका यज्ञमें भाग स्वीकार कर लेनेपर इन्द्रका संकट-मुक्त होना तथा लोमशजीके द्वारा अन्यान्य तीर्थोंके महत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 4-7h
 
 
श्लोक  3.125.4-7h 
न ते मिथ्या समारम्भो भवत्वेष परो विधि:।
जानामि चाहं विप्रर्षे न मिथ्या त्वं करिष्यसि॥ ४॥
सोमार्हावश्विनावेतौ यथा वाद्य कृतौ त्वया।
भूय एव तु ते वीर्यं प्रकाशेदिति भार्गव॥ ५॥
सुकन्याया: पितुश्चास्य लोके कीर्ति: प्रथेदिति।
अतो मयैतद् विहितं तव वीर्यप्रकाशनम्॥ ६॥
तस्मात् प्रसादं कुरु मे भवत्वेवं यथेच्छसि।
 
 
अनुवाद
'आपके द्वारा आयोजित यह यज्ञ मिथ्या न हो। आपने जो कुछ किया है, वह उत्तम अनुष्ठान हो। हे ब्रह्मर्षि! मैं जानता हूँ कि आप अपने संकल्प को कभी भी नष्ट नहीं होने देंगे। आज जैसे आपने इन अश्विनीकुमारों को सोमपान के योग्य बनाया है, वैसे ही मेरा भी कल्याण करें। हे भृगुपुत्र! आपका परम तेज प्रकट हो और सुकन्या तथा उसके पिता का यश संसार में फैले। इसी उद्देश्य से मैंने आपके बल और पराक्रम को प्रकट करने के लिए यह कार्य किया है। अतः आप प्रसन्न होकर मुझ पर अपनी कृपा बरसाएँ। आप जो चाहेंगे, वही होगा।'॥ 4-6॥
 
‘May this yajna organized by you not be false. Whatever you have done should be the best ritual. O Brahmarshi! I know that you will never let your resolve go wrong. Today, just as you have made these Ashwinikumars eligible to drink Soma, similarly do good to me too. O son of Bhrigu! May your maximum power come to light and may the fame of Sukanaya and her father spread in the world. For this purpose, I have done this work to make your strength and valour known. Therefore, be pleased and shower your blessings on me. Whatever you wish, it will happen.'॥ 4-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)