Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.125.24: महाराज! यहाँ क्षमाशील और परम धर्मात्मा पुरुष रहते थे। यह महान पर्वत उन सज्जन पुरुषों के लिए उत्तम आश्रय है, जो सरलचित्त और सब पर मैत्रीभाव रखते हैं। | mahabharat अध्याय 3.125: अश्विनीकुमारोंका यज्ञमें भाग स्वीकार कर लेनेपर इन्द्रका संकट-मुक्त होना तथा लोमशजीके द्वारा अन्यान्य तीर्थोंके महत्त्वका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाराज! यहाँ क्षमाशील और परम धर्मात्मा पुरुष रहते थे। यह महान पर्वत उन सज्जन पुरुषों के लिए उत्तम आश्रय है, जो सरलचित्त और सब पर मैत्रीभाव रखते हैं।
King! Those forgiving and most pious men lived here. This great mountain is a good shelter for the noble men who have a simple mind and are friendly towards all. 24.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥