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mahabharat 3.125.19: राजेन्द्र! यहाँ राजा शान्तनु, शुनक और नर-नारायण - ये सभी अपने सनातन धाम को चले गए हैं॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.125: अश्विनीकुमारोंका यज्ञमें भाग स्वीकार कर लेनेपर इन्द्रका संकट-मुक्त होना तथा लोमशजीके द्वारा अन्यान्य तीर्थोंके महत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 125: अश्विनीकुमारोंका यज्ञमें भाग स्वीकार कर लेनेपर इन्द्रका संकट-मुक्त होना तथा लोमशजीके द्वारा अन्यान्य तीर्थोंके महत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.125.19 
शान्तनुश्चात्र राजेन्द्र शुनकश्च नराधिप:।
नरनारायणौ चोभौ स्थानं प्राप्ता: सनातनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! यहाँ राजा शान्तनु, शुनक और नर-नारायण - ये सभी अपने सनातन धाम को चले गए हैं॥19॥
 
Rajendra! Here King Shantanu, Shunak and Nara-Narayana - all of them have gone to their eternal abode.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)