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mahabharat 3.125.17-18: युधिष्ठिर! यहाँ नाना प्रकार के देवताओं के अनेक मंदिर देखे जा सकते हैं। यह चन्द्रतीर्थ है, जिसकी पूजा अनेक ऋषि करते हैं। यहाँ बालखिल्य नामक एक महान वैखानस रहते हैं, जो वायु का सेवन करते हैं और अत्यंत पवित्र हैं। यहाँ तीन पवित्र शिखर और तीन झरने हैं। अपनी इच्छानुसार उनकी परिक्रमा करके स्नान करो।॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 3.125: अश्विनीकुमारोंका यज्ञमें भाग स्वीकार कर लेनेपर इन्द्रका संकट-मुक्त होना तथा लोमशजीके द्वारा अन्यान्य तीर्थोंके महत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 125: अश्विनीकुमारोंका यज्ञमें भाग स्वीकार कर लेनेपर इन्द्रका संकट-मुक्त होना तथा लोमशजीके द्वारा अन्यान्य तीर्थोंके महत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  3.125.17-18 
चैत्याश्चैते बहुविधास्त्रिदशानां युधिष्ठिर।
एतच्चन्द्रमसस्तीर्थमृषय: पर्युपासते।
वैखानसा बालखिल्या: पावका वायुभोजना:॥ १७॥
शृङ्गाणि त्रीणि पुण्यानि त्रीणि प्रस्रवणानि च।
सर्वाण्यनुपरिक्रम्य यथाकाममुपस्पृश॥ १८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! यहाँ नाना प्रकार के देवताओं के अनेक मंदिर देखे जा सकते हैं। यह चन्द्रतीर्थ है, जिसकी पूजा अनेक ऋषि करते हैं। यहाँ बालखिल्य नामक एक महान वैखानस रहते हैं, जो वायु का सेवन करते हैं और अत्यंत पवित्र हैं। यहाँ तीन पवित्र शिखर और तीन झरने हैं। अपनी इच्छानुसार उनकी परिक्रमा करके स्नान करो।॥17-18॥
 
Yudhishthira! You can see many temples of gods of various types. This is Chandratirtha, which is worshipped by many sages. Here lives a great Vaikhanasa named Balakhilya, who eats air and is extremely pure. There are three holy peaks and three waterfalls here. Take a bath after circumambulating them as per your wish.॥17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)